Tuesday, August 21

Author: Dhirendra Panchal

धीरेन्द्र पांचाल

धीरेन्द्र पांचाल

शायरी
शायरी....... चट्टानों को तोड़ दिया है ,कुछ हँसमुख चौराहों ने । रिश्ते चकनाचुर कर दिए,क़ातिल भरी निगाहों ने, जब हँसी ठिठोलि ग़ैरों से हो,अपना भाई ज़हर लगे, फिर मस्जिद से क्या ख़ता हुई,जब क़त्ल किया ईदगाहों नें । धीरेन्द्र पांचाल......
अमित मिश्रा

अमित मिश्रा

आलेख
मिथिला क प्रतीक आ शान :- पान,मखान, माछ आ पाग............ पान.... पान के पेशकश मिथिला में सम्मान के प्रतीक होइत ऐच्छ। दरभंगा के पान कोलकाता के पान बजार में एकटा विशेष स्थान रखइत ऐच्छ। गत कतेक वर्ष में मिथिला में पान के खेती में बहुत गिरावट आइल ऐच्छ। मिथिला में चौरसिया समुदाय के लोक जादा पान के खेती करैत छैथ, मिथिला में पान के बिना कोनो भी शुभ कार्य के पूरा नहीं कैल जाईत ऐच्छ। ई विवाह अनुष्ठान सब में सेहो इस्तेमाल होईत ऐच्छ और भैया दूज जैहेन त्योहार में सेहो। अपन मिथिला में अतिथि के स्वागत सेहो एकटा पान स कैल जाइत ऐच्छ। मखान.... मखान मिथिला में पानी के भंडार के कारण लोकप्रिय ऐच्छ व एकर बहुत रास सांस्कृतिक कार्य मे सेहो बहुत महत्व ऐच्छ।गत किछ साल में मखान के मांग नई केवल अपन देश परन्तु विदेश में सेहो वृद्धि भेल ऐच्छ।ई एकतरहक स्नैक फूड सेहो ऐच्छ जे लोकप्रिय ऐच्छ कियाकि अहि में प्रोटीन,
जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

कविताएं
. मन भीतरि समाइल ----------------------- अचके छोड़ि पराइल ई मूढ़ मतिया। मन भीतरि समाइल माहुर बतिया। साँझ बेवा नीयन लोर छलका गइल भाव भंगुआइल, छाव बसिया गइल भोरे कूंहुकल करेज फटल छतिया। मन भीतरि समाइल माहुर बतिया। रउंदल मनवा से गफलत मे जीयल मउरल जिनगी के सुधिया से सीयल बहुरल ना तबहूँ बिरहिन के रतिया। मन भीतरि समाइल माहुर बतिया। मनवा क पिरिया सुनुगे आ धधके चितवन बिसारी जस अदहन खदके कबहूँ न संवरी छितिराइल थतिया। मन भीतरि समाइल माहुर बतिया। • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
राजेश “राजू”

राजेश “राजू”

कविताएं
  लोक लाज आज सब दबाई गईल फैशन से। नर हौ की नारी न अंतर जनात बा।। शिष्टाचार सभ्यता किताबी मे बन्द भईल। अश्लीलता ही अब महान भईल जात बा।। शासन भूलाइल अनुशासन क पाठ बस। भाषण के राशन से पेट भर जात बा।। कली के प्रभाव से अभाव भईल शिक्षा क।   समाज क बुराई आधुनिकता कहात बा ।। राजेश विश्वकर्मा “राजू” सिकंदरपुर,चकिया,चन्दौली, u.p.
अविनाश शर्मा

अविनाश शर्मा

कविताएं
मोहब्बत की यादें......................... हमने जो की थी मोहब्बत वो याद आज भी है, तेरी मुस्कान और बचकानी बातें वो याद आज भी है। तेरे लिए तो हर खुशी मांगी थी रब से, पर जो जख्म मिला मुझे वो याद आज भी है। दिया था जब अपनी तस्वीर वो याद आज भी है, लबों से जो मुस्कुराई वो याद आज भी है। चाहता तो चुरा लेता तुझे इस जहां से, लेकिन घरवालो से मिलें संस्कार वो याद आज भी है। बताई जब अपनी सगाई की बात वो याद आज भी है, नजर न मिला सकी हमसे वो याद आज भी है। नही करूँगा मोहब्बत अब कभी किसी से, क्योकि कांच की तरह बिखर गया था वो याद आज भी है। अविनाश शर्मा(पांचाल) भीषमपुर चकिया,चंदौली उत्तर प्रदेश(UP)
निखिल तिवारी

निखिल तिवारी

कविताएं
देखो कितना परेशान है ज़िंदग़ी........... कभी खुशी तो कभी आंशु का गुलाम है ज़िन्दगी देखो कितना परेशान है ज़िंदग़ी । कभी अपनो को मनाने में तो कभी सपनो को सजाने में कितना बेवस लाचार है ज़िंदगी देखो कितना परेशान है ज़िन्दगी । कभी धूप कभी छाया में कभी सत्य कभी माया में अपनो की धक्कों से लाचार है जिंदगी देखो कितना परेशान है जिंदगी । महफ़िलो में नज़र नही आती है तन्हाई में दुश्मन बन जाती है कभी जी भर के हँसाती है ज़िन्दगी तो कभी जी भर के रुलाती है ज़िंदगी देखो कितना परेशान है जिंदगी । किसी के अहंकार का ताज है तो किसी की दो रोटी का मोहताज़ है ज़िन्दगी किसी की अपनो के ठोकरों से रुलाती है तो किसी ने अपनो की उम्मीदों से सजाया है जिंदगी देखो कितना परेशान है जिंदगी । निखिल तिवारी रामपुर,सैयदराजा चंदौली (उ0 प्र0)
धीरेन्द्र पांचाल

धीरेन्द्र पांचाल

शायरी
शायरी........ बिन पतझड़ गिरने लगी हैं पत्तियाँ अब साख से , हिचकियों का दोष क्या जब चली कटारी आँख से, मिलने और बिछड़ने का भी एक सिलसिला जारी था, तिलक कर लिया हमने भी उन चिट्ठियों की राख से । 🙏🏻🙏🏻धीरेंद्र पांचाल
राहुल विश्वकर्मा

राहुल विश्वकर्मा

कविताएं
  जब से मिली है तू मुझे, मैं तेरी ही बाते करता हूं। तेरी ही यादों में अब तो , दिन रात मैं खोया रहता हूँ। देकर मुझको इतना दर्द, तुम खुश कैसे रहती होगी। करके याद हमें तुम भी तो, रातो रातो रोती होगी। दिया है दिल का दर्द मुझे, सहने की कोशिश करता हूं, तेरी ही यादो में अब तो, दिन रात मैं खोया रहता हूँ। हाथ में लेकर फ़ोटो तेरी, एकटक निहारता रहता हूँ। लाख कर तू हँसाने की कोशिश, रातो में रोया करता हूं। तेरी ही यादों में अब तो, दिन रात मैं खोया रहता हूं। तेरी ही यादों में अब तो, दिन रात में खोया रहता हूँ। राहुल विश्वकर्मा भिषमपुर चकिया जिला-चंदौली(उत्तर प्रदेश)
अमित मिश्रा

अमित मिश्रा

कविताएं
  कल हो ना हो….....   जी लो इस पल को कल हो ना हो, कल के भरोसे मत बैठो कल हो ना हो। जीवन के हर जंग से आज लड़ो कल हो ना हो, रिश्तों के हर रंग को आज भरो कल हो ना हो। हर सपने को पूरा करो कल हो ना हो, हर अपने को खुश रखो कल हो ना हो। कल का सोच के आज मत बैठो कल हो ना हो, आज करो सब काम अधूरे कल हो ना हो। जीवन एक मायाजाल है ये माया कल हो ना हो, सब अपने है लेकिन सपने क्या पता कल हो ना हो। जी लो इस पल को कल हो ना हो, कल के भरोसे मत बैठो कल हो ना हो। :-अमित मिश्रा
अमित मिश्रा

अमित मिश्रा

आलेख
आंचलिक भाषा का एक महत्वपूर्ण लेख ........................... 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻💐💐💐💐 मिथिला के विवाह....... मिथिलांचल में वैवाहिक रीति-रिवाज कनि अलग होइत ऐच्छ। ज्यादातर अपन-सभहक जीवन शैली स अपरिचित लोग के मिथिला के विवाह के विध–व्यवहार बेतुका और दीर्घावधि वला लगैत ऐच्छ। लेकिन ई सर्वविदित ऐच्छ की मैथिल दम्पतिं में जे पारस्परिक प्रेम भाव होइत ऐच्छ, एक दोसर के प्रति जे सम्मान के भावना होइत ऐच्छ, से गौर करे वला बात ऐच्छ। कखनो कखनो त एकदम बेमेल विवाह सेहो सफल भ जाइत ऐच्छ। सबसे पहीले वर जखन वधु के द्वार पर आबैत छैथ त वर के सब के समक्ष अपन वस्त्र बदले परैत ऐच्छ ताकि वर के कोनो शारीरिक दोष त नई छैन? तहन विधकरी(एकटा अनुभवी महिला जही पर सबटा विधि–व्यवहार करबाबई के जिम्मा होइत ऐच्छ) द्वारा परिछन के दौरान हुनक