Tuesday, August 21

गीत

गीत

रत्नेश चंचल

रत्नेश चंचल

गीत
         @ गीत 📝📝 दिन बदल गइल रात बदल गइल पहिले वाली बात बदल गइल , रहि- रहि टीस उठेला हमरा मनवां में अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में | केहु ना दुअरा पर लउके बइठल सबे चुहानी बा बेड बिस्तरा कूलर टीवी तबो सून दलानी बा, बिरहा कजरी सुनाला ना सिवनवां में अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में | अब त सून बंड़ेरी लागे उचरे नाहीं कागा भरके ना चुल्हा के आगी टूटे सगुन के धागा, झुलुआ लागे नाहीं संउंसे सवनवां में अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में | राजा वाला कहनी हमरा बचवा के ना आवेला गुल्ली डंडा खेल मदाड़ी बचपन याद दिलावेला केहु गावे नाहीं फगुआ फगुनवां में अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में || रत्नेश चंचल वाराणसी