Thursday, September 20

दोहा

दोहा

रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

दोहा
दोहा _______________________________ 1. शिव से पहले सृष्टि को,सखे,निरर्थक जान।     सदा एक के बाद ही मिले शून्य को मान।।     ~~ रुद्र प्रताप सिंह "रुद्र" 2.संयम ही संन्यास है,संयम ही सम्भोग। संयम सहज समाधि है,है संयम ही योग।। संयम को ही साध तू,संयम श्रेष्ठाचार। संयम से संयम सधे,सधे सकल व्यवहार।। ~~रुद्र प्रताप सिंह "रुद्र" 3.सहज त्याग संन्यास है,सहज भोग सम्भोग।    सहज लगे,वह ध्यान है,सहज सधे,वह योग।।    पाना उसको है कठिन,हो जो अपने पास।    नहीं सहजता यूँ सहज,करो और अभ्यास।।    ~~रुद्र प्रताप सिंह "रुद्र"   4. साधो बस अवधान को,यही सनातन युक्ति।     साधो! यही स्वतन्त्रता,सन्तो! यही विमुक्ति।।    (अवधान~ सजगता)    ~~रुद्र प्रताप सिंह "रुद्र" 5.सोच,कौन है सोचता, लगा कान पे कान।    कौन देखता,देख तू, यही योग औ' ध्यान।।        ~~रुद्र प्रताप सिंह "रुद्र"   शोधछात