Tuesday, August 21

शायरी

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धीरेन्द्र पांचाल

धीरेन्द्र पांचाल

शायरी
शायरी....... चट्टानों को तोड़ दिया है ,कुछ हँसमुख चौराहों ने । रिश्ते चकनाचुर कर दिए,क़ातिल भरी निगाहों ने, जब हँसी ठिठोलि ग़ैरों से हो,अपना भाई ज़हर लगे, फिर मस्जिद से क्या ख़ता हुई,जब क़त्ल किया ईदगाहों नें । धीरेन्द्र पांचाल......
धीरेन्द्र पांचाल

धीरेन्द्र पांचाल

शायरी
शायरी........ बिन पतझड़ गिरने लगी हैं पत्तियाँ अब साख से , हिचकियों का दोष क्या जब चली कटारी आँख से, मिलने और बिछड़ने का भी एक सिलसिला जारी था, तिलक कर लिया हमने भी उन चिट्ठियों की राख से । 🙏🏻🙏🏻धीरेंद्र पांचाल
रत्नेश चंचल

रत्नेश चंचल

शायरी
शायरी............ (1) वो शख्स इस कदर घबरा रहा है हर बार अपने आप को डरा रहा है जो अब तक समझ नहीं पाया वो वही बात बार बार  समझा रहा है । (2) उनके मुहब्बत का मैं आज तलक कर्जदार हूं दुख इस बात का है कि उनके नजर में गद्दार हूं । (3) दिल के मामले में दिमाग लगाना अच्छा नहीं लगता बेवाहीयात बातों से बरगलाना अच्छा नहीं लगता वो बड़े गुमान में है जिसके पैरों तले जमीन नहीं वैसे शख्स के यहां आना जाना अच्छा नहीं लगता। (4) वो सत्यवादी था अब झूठ बोलता है                लंका में खड़ा होकर उसे बैकुंठ बोलता है ।। (5)                                                                 चर्चा है बहुत उनकी बड़े मशहूर लगते हैं            इसी खयाल में डुबकर बड़े मगरुर लगते हैं          हमें भी थी बड़ी हसरत दीदार कि उनके           उनसे मिलकर मैं पाया बड़े मजबूर लगते हैं ।              
योगेन्द्र शर्मा “योगी”

योगेन्द्र शर्मा “योगी”

शायरी
शायरी.....🚩🚩🚩🚩 रौंद कर पैरों तले जो ख्वाब सारे मल दिये, वो कातिल कहाँ कोई गैर थे जो कत्ल करके चल दिये।।   युवा कवि- योगेन्द्र शर्मा “योगी” ग्राम- भीषमपुर,चकिया, चन्दौली
योगेन्द्र शर्मा “योगी”

योगेन्द्र शर्मा “योगी”

शायरी
  राष्ट्रपति का राष्ट्र नाम सम्बोधन है अखबारों में , ओढ़ उसी सम्बोधन को कोई रात बिताता जाड़ों में । युवा कवि - योगेन्द्र शर्मा "योगी" ग्राम - भीषमपुर , चकिया , चन्दौली u.p.
धीरेन्द्र पांचाल

धीरेन्द्र पांचाल

शायरी
नीर आंखों से तेरे मचल जाएंगे बनकर आंसू जमाने में ढल जाएंगे । ना करना हमें याद फुर्सत में तुम , निर्दोष काजल बिचारे भी धूल जाएंगे ।। 📝धीरेन्द्र पांचाल की कलम से