Wednesday, November 21

कहानी

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रवि सिंह

रवि सिंह

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"कन्यादान_के_अधिकार......... पूरा बीस साल बाद मंजू आपन बेटी शिवानी के लेके गाँवे आईल रहली।घर के कोना-कोना से उनकर ईयाद जुडल रहे।आँगना,दुवार,तुलसी-चौड़ा,ईनार,निम के गाछ सब मंजू के बीस बरिष पहिले के जिनगी ईयाद दिवावत रहे।केतना सुंदर हसत-खेलत परिवार रहे,सब केहू आँख में बसा के राखे नवकी दुलहिन के बाकिर उ रात उनका खातिर कवनो अमावस के रात से कम ना रहे,उनका हसत-खेलत जिनगी के आपन कालिख से तोप दिेहलस।उ तूफान भरल रात आ अचानक उठल छाती के दर्द उनका पति के हमेशा खातिर उनका से छीन लिहलस आ इहाँ से उनकर जिनगी आपन दोसरका रूप देखावे लागल। काल्ह ले जे दुल्हिन आँखि के पुतरी नियन रहली अब बस एगो अभागिन विधवा होके रह गईल रहली।घर के लोग अंधविश्वास में बेसी भरोसा करत रहे लोग।सब केहू के ब्यवहार बदले लागल रहे।अब त निमन काम पर जाए के बेरा लोग उनकर मुँह भी देखल ना चाहे।हर काम मे शुभ-अशुभ देखाए लागल।जवन घर मे उ आ
रवि सिंह

रवि सिंह

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बाबूजी ______________ बाबूजी बड़ा मिलनसार स्वभाव के निमन आदमी रहले। गावँ के लोग के सुख-दुुख खातिर हमेशा आगा रहस उनका येही स्वभाव के कारन लईका से सेयान सब केहू उनका बाबूजी कहे।राकेश आ रागिनी दुगो संतान रहे बाबूजी के। बाकी लईका आ लईकी में कवनो फरक ना कइनी बाबूजी। दुनु के पढ़े खातिर पानी नियन पईसा बहवनी।बेटा पढ़- लिख के इंजीनियर भईले बाकी इंजीनियर भईला के बाद भी नॉकरी मुश्किल रहे ,बाबूजी ले दे के नॉकरी भी करवा दिहनी।राकेश के जल्दिये पटना में नॉकरी लाग गईल आ लगले एगो पढ़ल- लिखल लईकी देख के बेटा के बियाह भी क दिहनी।अब बाँच गईली रागिनी, बाबूजी उनको के पढ़ा-लिखा के वकील बना दिहनी आ तबहुँ जब मन के संतोष ना भईल त निमन घर देख के खूब दहेज देके भारी घर मे बेटि के बियाह क दिहनी।अब दुनु जाना आपना जिंदगी में खुश रहे लोग आ बाबूजी राकेश के माई के संगे गाँवे रहस। राकेश जड़िये से एक नंबर के मलेक्ष रहले।प
जियाउल हक़

जियाउल हक़

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अनसुनी कहानी भिखारी ठाकुर....... 27 मई 1964 के दिन जैतपुर गाँव में बहुते हलचल रहे। लईकन लईकन के मुँह से ईहे निकले आज भिखारी ठाकुर के नाच देखे के मिली। सिंह जी के भाई के बरात रहे ओही में भिखारी ठाकुर जी के नाच के साटा बन्हाईल रहे। सिंह जी के चार गाँव में चलती चलत रहे। सिंह जी बहुते दबंग आदमी रले। कुछ देर बाद में दूल्हा के नहवा देहल गईल। दुआरा पर भिखारी ठाकुर जी के प्रोग्राम चालू हो गईल। लोग एकदम टुट गईल नाच देखे खातिर। बहुते लोग खुश भईल नाच देख के। अब बारात निकले लागल। लोग कहत फिरे वाह माजा आ गईल नाच देख के। परछावन हो गईल बरात लइकी वाला के दुआरा पहुँचल गईल। लइकी वाला भी बहुते जबरदस्त स्वागत कइले। जवना गाँव मे बारात जात रहे ऊ गाँव के भी लोग बहुते खुश रहे की पहिली बार भिखारी ठाकुर जी के नाच ऊ गाँव में गइल रहे। स्टेज त जबरदस्त सजल रहे, लोग जल्दी-जल्दी खाना खाके स्टेज के आगे बईठे के चालू क