Wednesday, November 21

आलेख

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अजीत मालवीया “ललित”

अजीत मालवीया “ललित”

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  || अपरिपक्व शिक्षक ||................ शिक्षक सभी पदों में महत्वपूर्ण पद होता है लेकिन शिक्षक जब से व्यापारी हुआ है, तब से शिक्षा का मूल्य भी काफी हद तक गिर गया है। जब से शिक्षक व्यापारी हुआ है, तब से शिक्षा केवल नाम की ही रह गई है। शिक्षक जब से व्यापारी हुआ है, तब से उसने विद्यार्थी को समझना ही बंद कर दिया है। वह केवल अपनी धुन में रम्य स्वयं को पुरोहित समझ रहे है।           यह जानते हुए भी कि आज जो मैं मैं लिख रहा हूं वह भी एक शिक्षक की बदौलत ही है, किंतु जो सत्य है उसे अधिक समय तक दबाकर नहीं रखा जा सकता या यूं कहूं कि वह स्वयं ही अधिक समय तक दबकर नहीं रह सकता है और इसका मुख्य कारण यह है कि जो पुराने शिक्षक थे या हैं उनसे नए शिक्षकों की तुलना करने पर पुराने ही भारी पड़ते हैं। यह जानते हुए भी कि जमाना हाईटेक हो गया है, सभी को वर्तमान परिस्थिति में ढल जाना चाहिए किंतु क्या ह
अमित मिश्रा

अमित मिश्रा

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मिथिला क प्रतीक आ शान :- पान,मखान, माछ आ पाग............ पान.... पान के पेशकश मिथिला में सम्मान के प्रतीक होइत ऐच्छ। दरभंगा के पान कोलकाता के पान बजार में एकटा विशेष स्थान रखइत ऐच्छ। गत कतेक वर्ष में मिथिला में पान के खेती में बहुत गिरावट आइल ऐच्छ। मिथिला में चौरसिया समुदाय के लोक जादा पान के खेती करैत छैथ, मिथिला में पान के बिना कोनो भी शुभ कार्य के पूरा नहीं कैल जाईत ऐच्छ। ई विवाह अनुष्ठान सब में सेहो इस्तेमाल होईत ऐच्छ और भैया दूज जैहेन त्योहार में सेहो। अपन मिथिला में अतिथि के स्वागत सेहो एकटा पान स कैल जाइत ऐच्छ। मखान.... मखान मिथिला में पानी के भंडार के कारण लोकप्रिय ऐच्छ व एकर बहुत रास सांस्कृतिक कार्य मे सेहो बहुत महत्व ऐच्छ।गत किछ साल में मखान के मांग नई केवल अपन देश परन्तु विदेश में सेहो वृद्धि भेल ऐच्छ।ई एकतरहक स्नैक फूड सेहो ऐच्छ जे लोकप्रिय ऐच्छ कियाकि अहि में प्रोटीन,
अमित मिश्रा

अमित मिश्रा

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आंचलिक भाषा का एक महत्वपूर्ण लेख ........................... 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻💐💐💐💐 मिथिला के विवाह....... मिथिलांचल में वैवाहिक रीति-रिवाज कनि अलग होइत ऐच्छ। ज्यादातर अपन-सभहक जीवन शैली स अपरिचित लोग के मिथिला के विवाह के विध–व्यवहार बेतुका और दीर्घावधि वला लगैत ऐच्छ। लेकिन ई सर्वविदित ऐच्छ की मैथिल दम्पतिं में जे पारस्परिक प्रेम भाव होइत ऐच्छ, एक दोसर के प्रति जे सम्मान के भावना होइत ऐच्छ, से गौर करे वला बात ऐच्छ। कखनो कखनो त एकदम बेमेल विवाह सेहो सफल भ जाइत ऐच्छ। सबसे पहीले वर जखन वधु के द्वार पर आबैत छैथ त वर के सब के समक्ष अपन वस्त्र बदले परैत ऐच्छ ताकि वर के कोनो शारीरिक दोष त नई छैन? तहन विधकरी(एकटा अनुभवी महिला जही पर सबटा विधि–व्यवहार करबाबई के जिम्मा होइत ऐच्छ) द्वारा परिछन के दौरान हुनक
रत्नेश चंचल

रत्नेश चंचल

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  हिन्दी दिवस पर युवा कवि रत्नेश चंचल का महत्वपूर्ण लेख ।📝📝📝📝📝📝 (निज भाषा उन्नति अहै)............ हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं वो भी दे रहे हैं जिनके चौखट के भीतर हिन्दी को जाना उसी तरह मना है जैसे कुछ समय पहले दलितों को मंदिर में जाने पर प्रतिबंध था पर उनकी जरूरत समाज के सभी वर्गों को था,है और रहेगा । कुछ यही हाल आज हिन्दी का भी है,हम इस भाषा का प्रयोग केवल और केवल औपचारिक रूप से करते हैं और जैसे ही हमारी औपचारिकता पूरी होती है हम इसे दरकिनार कर देते हैं । हिन्दी की जो समझ होनी चाहिये हम उससे आज भी दूर हैं । आधुनिक युग में अंग्रेजी हमारे घर के कोने-कोने तक पांव पसार चुकी है और हम अंग्रेजीयत को स्वीकार चुके हैं । शहर से लेकर गांव तक कॉनवेंट स्कूल का बोलबाला है और हम चाहते हैं की हमारा बच्चा जन्म लेते ही हमारा अभिवादन अंग्रेजी में करे,वो अंग