Saturday, October 20

धीरेन्द्र पांचाल

नीर आंखों से तेरे मचल जाएंगे
बनकर आंसू जमाने में ढल जाएंगे ।
ना करना हमें याद फुर्सत में तुम ,
निर्दोष काजल बिचारे भी धूल जाएंगे ।।

📝धीरेन्द्र पांचाल की कलम से

 

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