Saturday, October 20

जियाउल हक

गोरखपुर बच्चो का श्रध्दांजलि🌼🌼

पैसे होते तो बेटा को सरकारी अस्पताल मे ना ले गया होता।
शहर के जाने माने बड़ी हस्ती वाले डाक्टर से दिखाया होता।

टुट कर यु ही आज बिखरते नही मेरी बुढ़ापे के लाठीया
ये जख्म कितना गहरा है, जब अपना मरता तब समझ मे आया होता।

कल जो बेवसी के आलम मे तड़प-तड़प के माँ-बाप के गोद मे मरते रहे मासूम।
सच पूछिए तो कल का मंजर देख खुदा भी अपना आँसु बहाया होता ।

कुछ साँसे कुछ हवाए और यह दवाए उधार यहा मिलती नही साबह।
काश कोई खुदा का बन्दा कल का डूबते हुए मजझार बचाया होता।

जियाउल हक
जैतपुर सारण

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