Tuesday, August 21

कुमार नुसरत

नफरतों से फूटती चिंगारियाँ कहने लगी
फिर जलेगी अमन की बस्तियाँ कहने लगी

जन्म से पहले ही क्योंकर कोख में करते हो कत्ल
जिंदगी दे दो हमें भी बेटियाँ कहने लगी

वक्त से पहले उसे हालात ने बूढ़ा किया
उसके चेहरे की ये मुझसे झुर्रियाँ कहने लगी

फिर फिजाएं आ गई है गुलसितां में हर तरफ़
फूल पर बैठी हुई ये तितलियाँ कहने लगी

लाज के गहने से बढ़कर कोई भी गहना नहीं
टूटे फूटे कुछ घरों में देवियाँ कहने लगी

मशवरा है दोस्तों घर से ना बाहर झांकिए
आ गए कातिल गली में खिड़कियाँ कहने लगी

हो गई बेनूर ‘नुसरत’ एक बेवा की हयात
फर्श पे बिखरी हुई ये चूड़ियाँ कहने लगी

……………………………. कुमार नुसरत

 

नारनौल , हरियाणा
मो.- 9813318730

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