Tuesday, August 21

रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

दोहा

_______________________________

1. शिव से पहले सृष्टि को,सखे,निरर्थक जान।
    सदा एक के बाद ही मिले शून्य को मान।।

    ~~ रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

2.संयम ही संन्यास है,संयम ही सम्भोग।
संयम सहज समाधि है,है संयम ही योग।।

संयम को ही साध तू,संयम श्रेष्ठाचार।
संयम से संयम सधे,सधे सकल व्यवहार।।

~~रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

3.सहज त्याग संन्यास है,सहज भोग सम्भोग।
   सहज लगे,वह ध्यान है,सहज सधे,वह योग।।

   पाना उसको है कठिन,हो जो अपने पास।
   नहीं सहजता यूँ सहज,करो और अभ्यास।।

   ~~रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

 

4. साधो बस अवधान को,यही सनातन युक्ति।
    साधो! यही स्वतन्त्रता,सन्तो! यही विमुक्ति।।

   (अवधान~ सजगता)

   ~~रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

5.सोच,कौन है सोचता, लगा कान पे कान।
   कौन देखता,देख तू, यही योग औ’ ध्यान।।
   

   ~~रुद्र प्रताप सिंह “रुद्र”

 

शोधछात्र – भोजपुरी अध्ययन केंद्र B.H.U.

वाराणसी , उत्तर प्रदेश 

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *