Saturday, October 20

रत्नेश चंचल

         @ गीत 📝📝

दिन बदल गइल रात बदल गइल

पहिले वाली बात बदल गइल ,

रहि- रहि टीस उठेला हमरा मनवां में

अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में |

केहु ना दुअरा पर लउके

बइठल सबे चुहानी बा

बेड बिस्तरा कूलर टीवी

तबो सून दलानी बा,

बिरहा कजरी सुनाला ना सिवनवां में

अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में |

अब त सून बंड़ेरी लागे

उचरे नाहीं कागा

भरके ना चुल्हा के आगी

टूटे सगुन के धागा,

झुलुआ लागे नाहीं संउंसे सवनवां में

अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में |

राजा वाला कहनी हमरा

बचवा के ना आवेला

गुल्ली डंडा खेल मदाड़ी

बचपन याद दिलावेला

केहु गावे नाहीं फगुआ फगुनवां में

अब ना चहकेले गौरइया अंगनवा में ||

रत्नेश चंचल
वाराणसी

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