Tuesday, August 21

जियाऊल हक़

  “”””” एक कलमकार को श्रद्धांजली “””’

कैसे लिखे कोई सच्चाई, कलमो की हार की।
हो रही है हत्याए, बेकसूर कलमकार की।

रो रही है तहरीरे उनकी फट्टे अखबार मे।
बिक गए साथी ही उनके, पैसो की बाजार मे।

सून होकर हर बार कलमो की दुनिया रोई है।
लिखने वाले मिट जाते है, दुनिया चैन से सोई है।

गौरी लंकेश जैसो का, ईहा कोई ना होता पूँछ है।
हत्यारो की बस्ती मे, सबकी लम्बी लम्बी मूँछ है।

नमन करते है आपको फिर एक अवतार मिले।
फिर से हमे गौरी लंकेश जैसी कोई पत्रकार मिले।

जियाउल हक
जैतपुर सारण बिहार

 

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *