Saturday, October 20

जियाऊल हक़

गजल
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मेरे दिल का कोई खरीदार नही।
अकेलेपन में कोई प्यार नही।


जज्बात हुआ बेकाबू अब मेरा।
मै मनचलो का कोई व्यापार नही।

प्रेम नगरी अब हड़ताल हुई है।
जज्बातो का कोई संसार नही।

क्यों जख्म भरी कहानी बनाए।
आसपास यारो की भरमार नही।

बेवफाई मे सब रोते हैं शायद।
मैं दिवानों का कोई सरदार नही।


खोता नही किसी की चाहत मे यू।
मुझे खोने का कोई आधार नही।

सुन लो जिया मेरी बात पलभर।
तुम-सा यहाँ कोई गमखार नही।

जियाउल हक
जैतपुर सारण बिहार

One Comment

  • जियाउल हक

    आपका तहेदिल से धन्यवाद भाई साहब। मेरे हौसलाअफजाई करने के लिए

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