Saturday, October 20

जियाऊल हक़

भोजपुरी गजल……………

ई शहरी मे कईसन कईसन लोग सखी।
केहु हँसे, केहु रोये, ई कईसन संयोग सखी।

हम ही खुद गम के मारऽल बानी ईहवा
दोसरा के कईसे करी हम सहयोग सखी।
,
दुःख-दर्द के ई अंजान रहीया सन मे।
बईठ के, के मनाई झुठ-मूठ के सोग सखी।
,
चार छः दिन के साथी बारे सब ईहवा।
सुख-दुख सब मिलके ईहा भोग सखी।
,
हँसले, गाले, झूम झाम के जीले जीनगी।
गुमनाम भईले बहुते जिया जईसन लोग सखी
,

जियाउल हक
जैतपुर सारण बिहार
पिन- 841205

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *