Tuesday, August 21

रवि सिंह

बाबूजी ______________

बाबूजी बड़ा मिलनसार स्वभाव के निमन आदमी रहले। गावँ के लोग के सुख-दुुख खातिर हमेशा आगा रहस उनका येही स्वभाव के कारन लईका से सेयान सब केहू उनका बाबूजी कहे।राकेश आ रागिनी दुगो संतान रहे बाबूजी के। बाकी लईका आ लईकी में कवनो फरक ना कइनी बाबूजी। दुनु के पढ़े खातिर पानी नियन पईसा बहवनी।बेटा पढ़- लिख के इंजीनियर भईले बाकी इंजीनियर भईला के बाद भी नॉकरी मुश्किल रहे ,बाबूजी ले दे के नॉकरी भी करवा दिहनी।राकेश के जल्दिये पटना में नॉकरी लाग गईल आ लगले एगो पढ़ल- लिखल लईकी देख के बेटा के बियाह भी क दिहनी।अब बाँच गईली रागिनी, बाबूजी उनको के पढ़ा-लिखा के वकील बना दिहनी आ तबहुँ जब मन के संतोष ना भईल त निमन घर देख के खूब दहेज देके भारी घर मे बेटि के बियाह क दिहनी।अब दुनु जाना आपना जिंदगी में खुश रहे लोग आ बाबूजी राकेश के माई के संगे गाँवे रहस।
राकेश जड़िये से एक नंबर के मलेक्ष रहले।पाई-पाई के हिसाब राखस।हिसाब ले त ठीक रहे बाकी हर काम में पईसे के महत्व देस। समय बीतत गईल आ अब बाबूजी बेमार पड़ गईले डॉक्टर शहर जाए के सलाह देहलस।बाबूजी पटना चल गइनी बेटा- पतोह के लगे।दु दिन त सब ठीक रहे बाकी तीसरे दिन से बाबूजी के कष्ट होखे लागल काहे से की पतोह भी आफिस जात रहली। काम का टेलीफोन ऑपरेट करे के ले दे के रू.2000/- मिले बाकी बेटा सब पाई के हिसाब पहिलहीं बना रखले रहले। बाबूजी के सेवा ला वक्त ना रहे।बाबूजी सोंचले जायेद बेटी के इहाँ चल जातानि।बेटी त बाबूजी के देखी के खूब खुश भईली आ मन लगा के सेवा टहल करस।जल्दिये बाबूजी बेमारी से त ठीक होखे लगले बाकी लोकलाज के मारे बाबूजी केहू से कुछ ना कहनि आ गाँव-घर के याद के बहाना बनाके चुपचाप घर के रास्ता ध लिहनी।
गाँवे अईला के बाद फेरु धीरे – धीरे बाबूजी के तबियत बिगड़े लागल।बाकिर बेटा ओकरा बाद एक हालि फोनो क के बाबूजी के हाल ना पुछले।हालत दिन पर दिन खराब होत रहे बाकी राकेश के फुरसत कहाँ रहे। हम त कई दफा राकेश के फोन भी कइनी बाकिर आज आवतानी, बिहान आवतानी , टूर पर बानी कह के राकेश बात के टाल देस।जब तबियत बहुते बिगड़ गईल आ हमरा से ना देखल गईल त अंत मे एगो गाड़ी रिज़र्व क के पटना राकेश के लगे भेज दिहनी।डॉक्टर कह दिहलस इनका दवा के ना सही देखभाल के जरूरत बा ।बाकी राकेश के लगे ओतना टाइम कहाँ रहे की बाबूजी के सेवा करस। राकेश अस्पताल से बाबूजी के लेके गाँवे आ गइले आ बाबूजी के उतार के उलटे गोरे पटना चली गइंले।माई त इहे सोंच-सोंच के आंसू बहावस की लोग बेटा- बेटा करेला आ गावेला
“जवना कोखि बेटा नाहिं ,
उहो कोखि शुद्ध नाहिं,
बिना बेटा कैसे मुक्ति मिली ऐ लखनजी। बिना बेटा कईसे मुक्ति मिली ऐ लखनजी।”
आ हमनी त इंजीनियर बेटा के माई-बाप हई सन आ जब जियता में बेटा के लगे बाप के देखे के समय नईखे त मुआला प कईसे मुक्ति मिली…..
आ एतने सोंच के बेहोश हो जास।माई के आत्मा त फिर भी माफ के देवे बाकिर एगो असहाय पत्नी के आत्मा कईसे???? जे आपना औलाद खातिर आपन सब खुशी भुला दिहल,जे औलाद के ख़ुशी में ही आपन खुशी देखल,जे औलाद के छोट से छोट जिद्द मानेला आपन सर्वस्व न्योछावर क दिहल आज ओ औलाद के लगे आपन जन्मदाता खातिर समय नईखे ई देख के राकेश के माईआँसू बहावस बाकी देखे वाला के रहे।
बेटी के धन खाईल बाबूजी के मंजूर ना रहे बाबूजी बेटी के खराब तबियत वाला बात के भनक भी ना लागे देस।बेटी त रहे काफी दूर कलकत्ता शहर बाकी बाबूजी ओकरा मन में ही रहस।अब बाबूजी के बाँचे के उम्मीद ना रहे राकेश आ रागिनी खबर दुनु के गईल।बाकिर राकेश टूर के बहाना कही के ना अईले ,रागिनी त सुनते गाड़ी ध लिहली आ बिहान भईला हाजिर हो गईल रहली बाकी उहो बुझ गईल रहली की अब बाबूजी ना बचीहन। रागिनी आपन जी जान से सेवा कइली। माई त रो-रो के पागल हो गईल रहली आ एके गो गीत गावस
” जवना कोखि बेटा नाहिं ,
उहो कोखि शुद्ध नाहिं,
बिना बेटा कैसे मुक्ति मिली ऐ लखनजी।
बिना बेटा कईसे मुक्ति मिली ऐ लखनजी।”
आ एतने गा के बेहोश हो जास। बाबूजी भी भविष्य भांप लिहले रहनी आ उ चाहत रहनी की समाज के संंदेश दियाव की बेटा आ बेटी में कौनो फरक नईखे बेटा मुक्ति के द्वार ह ई सिर्फ सामाजिक ढकोसला आ पाखंड ह ।अब उ श्रवण पूत वाला जमाना नइखे आ इहे सोंच के रागिनी के बोला के कहनि जियता में हमार मुक्ति तहरे हाथे भईल अब मुआला के बाद भी तहरे से मुक्ति चाहीं , हमार मुखाग्नि तुंही दिह आ एतने कहके बाबूजी दुनिया त्याग दिहनी।
ई बात सुनते राकेश चार-पाँच घंटा के सफर तय क के आ गइले काहे से की कंपनी से दवाई के बिल पास करावे के रहे।राकेश के मलेक्षई के सबका पाता रहे बाकिर देवता समान बाप के मुआला में भी स्वार्थ ई देख के गाँव के लोग के आउरी छाती फाट गईल। लोग बाबूजी के अंतिम ईच्छा के मान राखि के अंतिम क्रिया के हक भी राकेश से छीन लेहल।अब त गाँव के लोग के भी जबान से इहे निकले अइसन बेटा से त बिन बेटे के आ भगवान दुश्मनों के अइसन बेटा ना देस ।

 

ग्राम-सिसई,भाया-तरवारा, पोस्ट-गोरयाकोठी,जिला-सिवान,बिहार

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