Saturday, October 20

“”” असलियत नेता जी के “””

झूठ की जमा पहन कर यह अपनी कुर्सी बचाते हैं।
असली नेता का हैं यहीं पेशा की अपनी हुकूमत जमाते हैं।

निवाला छीन कर जनता की ख़ुद की महल बनाना हैं।
और ध्यान भटकाने के लिए शहरों में दंगे कराते हैं।

इनके के डर से लोग चुप्पियाँ साध लेते हैं हर वक़्त।
चुप्पियाँ साधने का मतलब इनकी हम हौसला बढ़ाते हैं।

खिलाफ इनकी जो आवाज उठाने की कोशिश करते हैं।
अपनी पैसे और दम-बूते पर उनकी आवाज दबाते हैं।

वादा किये हुए बातों को भूल जाते है जीतने के बाद।
जनता जब पूछतीं हैं वादे, तो सिर्फ गोल-गोल घूमाते है।

जियाउल हक
जैतपुर सारण (बिहार)

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