Tuesday, August 21

बन्धू पाल “बन्धू”

बावला जी पर एक छन्द…..

सोच दाहिन बाँव नाहीं,कवनो दुराव नाहीं,भाव से भरल भण्डार बावला जी ,                            

विविध विधा क सर्वज्ञ मर्मज्ञ रहैं,भोजपुरी माटी क श्रींगार बावला जी।

भोजपुरी भेष- भुषा कुलियै लगाव रहै, कविता कला क चमत्कार बावला जी,                        

पुरा पूर्वांचल में डंका बजाय गइलैं, भीषमपुर गाँव क हमार बावला जी ।।

                        कवि- बन्धू पाल “बन्धू”
                        पता-भीषमपुर, चकिया,चन्दौली

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