Tuesday, August 21

रत्नेश चंचल

शायरी…………

(1)
वो शख्स इस कदर घबरा रहा है
हर बार अपने आप को डरा रहा है
जो अब तक समझ नहीं पाया वो
वही बात बार बार  समझा रहा है ।
(2)
उनके मुहब्बत का मैं आज तलक कर्जदार हूं
दुख इस बात का है कि उनके नजर में गद्दार हूं ।
(3)
दिल के मामले में दिमाग लगाना अच्छा नहीं लगता
बेवाहीयात बातों से बरगलाना अच्छा नहीं लगता
वो बड़े गुमान में है जिसके पैरों तले जमीन नहीं
वैसे शख्स के यहां आना जाना अच्छा नहीं लगता।
(4)
वो सत्यवादी था अब झूठ बोलता है                लंका में खड़ा होकर उसे बैकुंठ बोलता है ।।

(5)                                                                 चर्चा है बहुत उनकी बड़े मशहूर लगते हैं            इसी खयाल में डुबकर बड़े मगरुर लगते हैं          हमें भी थी बड़ी हसरत दीदार कि उनके           उनसे मिलकर मैं पाया बड़े मजबूर लगते हैं ।

                   

  रत्नेश चंचल…..
  वाराणसी

 

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