Tuesday, August 21

राहुल विश्वकर्मा

 

जब से मिली है तू मुझे,
मैं तेरी ही बाते करता हूं।
तेरी ही यादों में अब तो ,
दिन रात मैं खोया रहता हूँ।

देकर मुझको इतना दर्द,
तुम खुश कैसे रहती होगी।
करके याद हमें तुम भी तो,
रातो रातो रोती होगी।
दिया है दिल का दर्द मुझे,
सहने की कोशिश करता हूं,
तेरी ही यादो में अब तो,
दिन रात मैं खोया रहता हूँ।

हाथ में लेकर फ़ोटो तेरी,
एकटक निहारता रहता हूँ।
लाख कर तू हँसाने की कोशिश,
रातो में रोया करता हूं।
तेरी ही यादों में अब तो,
दिन रात मैं खोया रहता हूं।

तेरी ही यादों में अब तो,
दिन रात में खोया रहता हूँ।

राहुल विश्वकर्मा
भिषमपुर चकिया
जिला-चंदौली(उत्तर प्रदेश)

One Comment

  • अविनाश पांचाल

    लाजवाब कविता
    इस कविता को पढ़ के मुझे अत्यधिक शांति मिलती है राहुल जी को बहुत बहुत शुभकामनाएं और बहुत बहुत बधाई अपनी कविता के लिए और मैं बड़े भईया धीरेन्द्र पांचाल जी का भी बहुत बहुत धन्यवाद करता हु जिन्होंने साहित्य समाचार के माध्यम से इस कविता को प्रकाशित किया
    बहुत बहुत धन्यवाद

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