Tuesday, August 21

राजेश “राजू”

 

लोक लाज आज सब दबाई गईल फैशन से।
नर हौ की नारी न अंतर जनात बा।।
शिष्टाचार सभ्यता किताबी मे बन्द भईल।
अश्लीलता ही अब महान भईल जात बा।।
शासन भूलाइल अनुशासन क पाठ बस।
भाषण के राशन से पेट भर जात बा।।
कली के प्रभाव से अभाव भईल शिक्षा क।  
समाज क बुराई आधुनिकता कहात बा ।।

राजेश विश्वकर्मा “राजू”
सिकंदरपुर,चकिया,चन्दौली, u.p.

2 Comments

  • राहुल विश्वकर्मा

    बिल्कुल सत्य कथन है आपका आपकी लेखनी समाज को आईना दिखाती है। और एक अच्छा कवि वही लिखता है जिससे समाज में फैली बुराइयों और कुरीतियों का दमन होता है और आप वैसे ही कवियों में से एक है।
    बहुत ही लाजवाब पंक्तिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *