Tuesday, August 21

धीरेन्द्र पांचाल

शायरी…….

चट्टानों को तोड़ दिया है ,कुछ हँसमुख चौराहों ने ।
रिश्ते चकनाचुर कर दिए,क़ातिल भरी निगाहों ने,
जब हँसी ठिठोलि ग़ैरों से हो,अपना भाई ज़हर लगे,
फिर मस्जिद से क्या ख़ता हुई,जब क़त्ल किया ईदगाहों नें ।

धीरेन्द्र पांचाल……

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