Saturday, October 20

अमित मिश्रा

 

‘आजाद है हम’……………….

आजादी है हमें उन गोरों के गुलामी से,आजादी है हमें उन क्रूर शासकों के पैमानों से।

आजादी हैं हमें अपने विचारों से
मगर ये कैसी आजादी जिसमे होता भ्रष्टाचार है,अगर आजाद हैं हम तो होता कैसे बलात्कार है?

आजादी हैं हमें अपने बातों में,फिर लड़कियां क्यों डरती है अंधेरी रातों में?

आजादी है हमे मशहूर होने को लेकर
फिर कोई क्यों चला जाता है गरीबी के कारण इस दुनियां को छोड़कर।

आजादी है हमें दौलत-शौहरत कमाने में,फिर क्यों सिसकता है एक शहीद जवान का परिवार इस जमाने में।

निवेदन संग आवेदन है मेरा अपने देश के प्रतिनिधियों से,मुझे दिक्कत है आपलोग के इन राजनीतिक विधियों से।
कब-तक आप बस अपनी रोटी सकेंगे,जब कभी आप पे गुजरी तो अपने बनाये सिस्टम में खुदको नाचते देखेंगे।

हम आजाद है आजादी हमे सबसे न्यारी है,ये हमारा भारतदेश है जो प्राणों से अधिक हमें प्यारी है।

जिस दिन ऐसा आवेदन हर भारतवासी खुद से कर पाएंगे, सच केहता हूं उसी दिन अच्छे दिन आ जाएंगे।

:-अमित मिश्रा

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