Wednesday, November 21

अमित मिश्रा

 

शिक्षक दिवस पर निवेदित ……

ज्ञानचक्षु के धारा है गुरु,
स्वतः के प्रकाश से प्रकाशित तारा है गुरु।

जीवन के आधार है गुरु,
कठोरता से परिपूर्ण प्यार है गुरु।

जग के रचैता है गुरु,
इनके ही मार्गदर्शन से होता अच्छा मनुष्य बनने का कार्य शुरू।

स्वयं में ब्रह्मा,विष्णु,महेश है गुरु ,
मनुष्य के रचैता व विध्वंसकर्ता है गुरु।

अंधकार रूपी इस भवर के तारणकर्ता है गुरु,
अपने प्रकाश से उजाले की ओर ले जाने वाले कर्ता है गुरु।

गुरु से ही अर्थ है,
बिन गुरु ये जीवन व्यर्थ है।

:-अमित मिश्रा

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