Saturday, October 20

किशन झा

जिंदगी कितना धीरे चल रहा हूं मैं…………

खुद के भी पीछे खड़ा हूं मैं जिंदगी कितना धीरे चल रहा हूं मैं

जो हसीन ख्वाब आते थे जगाने उन्हें देखते हुए सोया पड़ा हूं मैं, जिंदगी कितना धीरे चल रहा हूं मैं

ख्वाहिशें जो बिन मांगे पूरी हो जाया करती थी
आज उन्हीं ख्वाहिशों को पूरी करने
अपना सब कुछ छोड़ चला हूं मैं, जिंदगी कितना धीरे चल रहा हूं मैं

वह मां का प्यार , पिता की डांट, बहन से झगड़ा , दोस्त की दोस्ती और कई अपनों का प्यार ख्वाहिशों के लिए छोड़ चला हूं मैं, जिंदगी कितना धीरे चल रहा हूं मैं

जिंदगी तन्हा सी हो गई
ना ख्वाहिशें पूरी हो रही,
ना अपने पास रहे
सपनों को पाने में खुद को भूल गया हूं मैं ,
जिंदगी कितना धीरे चल रहा हूं मैं

खुद के भी पीछे खड़ा हूं मैं जिंदगी कितना धीरे चल रहा हूं मैं

 

:-किशन झा

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