Saturday, October 20

Author: Dhirendra Panchal

निखिल तिवारी

निखिल तिवारी

कविताएं
देखो कितना परेशान है ज़िंदग़ी........... कभी खुशी तो कभी आंशु का गुलाम है ज़िन्दगी देखो कितना परेशान है ज़िंदग़ी । कभी अपनो को मनाने में तो कभी सपनो को सजाने में कितना बेवस लाचार है ज़िंदगी देखो कितना परेशान है ज़िन्दगी । कभी धूप कभी छाया में कभी सत्य कभी माया में अपनो की धक्कों से लाचार है जिंदगी देखो कितना परेशान है जिंदगी । महफ़िलो में नज़र नही आती है तन्हाई में दुश्मन बन जाती है कभी जी भर के हँसाती है ज़िन्दगी तो कभी जी भर के रुलाती है ज़िंदगी देखो कितना परेशान है जिंदगी । किसी के अहंकार का ताज है तो किसी की दो रोटी का मोहताज़ है ज़िन्दगी किसी की अपनो के ठोकरों से रुलाती है तो किसी ने अपनो की उम्मीदों से सजाया है जिंदगी देखो कितना परेशान है जिंदगी । निखिल तिवारी रामपुर,सैयदराजा चंदौली (उ0 प्र0)
धीरेन्द्र पांचाल

धीरेन्द्र पांचाल

शायरी
शायरी........ बिन पतझड़ गिरने लगी हैं पत्तियाँ अब साख से , हिचकियों का दोष क्या जब चली कटारी आँख से, मिलने और बिछड़ने का भी एक सिलसिला जारी था, तिलक कर लिया हमने भी उन चिट्ठियों की राख से । 🙏🏻🙏🏻धीरेंद्र पांचाल
राहुल विश्वकर्मा

राहुल विश्वकर्मा

कविताएं
  जब से मिली है तू मुझे, मैं तेरी ही बाते करता हूं। तेरी ही यादों में अब तो , दिन रात मैं खोया रहता हूँ। देकर मुझको इतना दर्द, तुम खुश कैसे रहती होगी। करके याद हमें तुम भी तो, रातो रातो रोती होगी। दिया है दिल का दर्द मुझे, सहने की कोशिश करता हूं, तेरी ही यादो में अब तो, दिन रात मैं खोया रहता हूँ। हाथ में लेकर फ़ोटो तेरी, एकटक निहारता रहता हूँ। लाख कर तू हँसाने की कोशिश, रातो में रोया करता हूं। तेरी ही यादों में अब तो, दिन रात मैं खोया रहता हूं। तेरी ही यादों में अब तो, दिन रात में खोया रहता हूँ। राहुल विश्वकर्मा भिषमपुर चकिया जिला-चंदौली(उत्तर प्रदेश)
अमित मिश्रा

अमित मिश्रा

कविताएं
  कल हो ना हो….....   जी लो इस पल को कल हो ना हो, कल के भरोसे मत बैठो कल हो ना हो। जीवन के हर जंग से आज लड़ो कल हो ना हो, रिश्तों के हर रंग को आज भरो कल हो ना हो। हर सपने को पूरा करो कल हो ना हो, हर अपने को खुश रखो कल हो ना हो। कल का सोच के आज मत बैठो कल हो ना हो, आज करो सब काम अधूरे कल हो ना हो। जीवन एक मायाजाल है ये माया कल हो ना हो, सब अपने है लेकिन सपने क्या पता कल हो ना हो। जी लो इस पल को कल हो ना हो, कल के भरोसे मत बैठो कल हो ना हो। :-अमित मिश्रा
अमित मिश्रा

अमित मिश्रा

आलेख
आंचलिक भाषा का एक महत्वपूर्ण लेख ........................... 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻💐💐💐💐 मिथिला के विवाह....... मिथिलांचल में वैवाहिक रीति-रिवाज कनि अलग होइत ऐच्छ। ज्यादातर अपन-सभहक जीवन शैली स अपरिचित लोग के मिथिला के विवाह के विध–व्यवहार बेतुका और दीर्घावधि वला लगैत ऐच्छ। लेकिन ई सर्वविदित ऐच्छ की मैथिल दम्पतिं में जे पारस्परिक प्रेम भाव होइत ऐच्छ, एक दोसर के प्रति जे सम्मान के भावना होइत ऐच्छ, से गौर करे वला बात ऐच्छ। कखनो कखनो त एकदम बेमेल विवाह सेहो सफल भ जाइत ऐच्छ। सबसे पहीले वर जखन वधु के द्वार पर आबैत छैथ त वर के सब के समक्ष अपन वस्त्र बदले परैत ऐच्छ ताकि वर के कोनो शारीरिक दोष त नई छैन? तहन विधकरी(एकटा अनुभवी महिला जही पर सबटा विधि–व्यवहार करबाबई के जिम्मा होइत ऐच्छ) द्वारा परिछन के दौरान हुनक
शम्भू नाथ शर्मा “दरदी “

शम्भू नाथ शर्मा “दरदी “

कविताएं
  गीत क्या है......... व्यथा ही गीत बनती है , व्यथा संगीत बनती है , व्यथा गाथा करुण स्वर में हो , कोकिल गीत बनती है | शम्भू नाथ शर्मा "दरदी " भीषमपुर ,चकिया ,चन्दौली , u.p.
सलिल सरोज

सलिल सरोज

कविताएं
गर अपना ही चेहरा देखा होता आईने में............. गर अपना ही चेहरा देखा होता आईने में तो आज  हुई न होती मुरब्बत ज़माने में ।।1।। गर मशाल थाम ली होती दौरे-वहशत में तो कुछ तो वजन होता तुम्हारे बहाने में ।।2।। जिसकी ग़ज़ल है वही आके फरमाए भी वरना गलतियाँ हो जाती है ग़ज़ल सुनाने में ।।3।। बाज़ार में आज वो नायाब चीज़ हो गए सुना है मज़ा बहुत आता है उन्हें सताने में ।।4।। रूठना भी तो ऐसा क्या रूठना किसी से कि सारी साँस गुज़र जाए उन्हें मनाने में ।।5।। एक उम्र लगी उनके दिल में घर बनाने में अब एक उम्र और लगेगी उन्हें भुलाने में ।।6।। दौलत ही सब खरीद सकता तो ठीक था यहाँ ज़िंदगी चली जाती है इज़्ज़त कमाने में ।।7।। वो आँखें मिलाता ही रहा पूरी महफ़िल में देर तो हो गई मुझ से ही इश्क़ जताने में ।।8।। जिधर देखो उधर ही बियाबां नज़र आता है नदियाँ कहाँ अब मिल पाती हैं मुहाने में ।।9।। गर बाप हो तो  जरूर
रत्नेश चंचल

रत्नेश चंचल

शायरी
शायरी............ (1) वो शख्स इस कदर घबरा रहा है हर बार अपने आप को डरा रहा है जो अब तक समझ नहीं पाया वो वही बात बार बार  समझा रहा है । (2) उनके मुहब्बत का मैं आज तलक कर्जदार हूं दुख इस बात का है कि उनके नजर में गद्दार हूं । (3) दिल के मामले में दिमाग लगाना अच्छा नहीं लगता बेवाहीयात बातों से बरगलाना अच्छा नहीं लगता वो बड़े गुमान में है जिसके पैरों तले जमीन नहीं वैसे शख्स के यहां आना जाना अच्छा नहीं लगता। (4) वो सत्यवादी था अब झूठ बोलता है                लंका में खड़ा होकर उसे बैकुंठ बोलता है ।। (5)                                                                 चर्चा है बहुत उनकी बड़े मशहूर लगते हैं            इसी खयाल में डुबकर बड़े मगरुर लगते हैं          हमें भी थी बड़ी हसरत दीदार कि उनके           उनसे मिलकर मैं पाया बड़े मजबूर लगते हैं ।              
बन्धू पाल “बन्धू”

बन्धू पाल “बन्धू”

कविताएं
बावला जी पर एक छन्द..... सोच दाहिन बाँव नाहीं,कवनो दुराव नाहीं,भाव से भरल भण्डार बावला जी ,                             विविध विधा क सर्वज्ञ मर्मज्ञ रहैं,भोजपुरी माटी क श्रींगार बावला जी। भोजपुरी भेष- भुषा कुलियै लगाव रहै, कविता कला क चमत्कार बावला जी,                         पुरा पूर्वांचल में डंका बजाय गइलैं, भीषमपुर गाँव क हमार बावला जी ।।                         कवि- बन्धू पाल “बन्धू”                         पता-भीषमपुर, चकिया,चन्दौली
योगेन्द्र शर्मा “योगी”

योगेन्द्र शर्मा “योगी”

शायरी
शायरी.....🚩🚩🚩🚩 रौंद कर पैरों तले जो ख्वाब सारे मल दिये, वो कातिल कहाँ कोई गैर थे जो कत्ल करके चल दिये।।   युवा कवि- योगेन्द्र शर्मा “योगी” ग्राम- भीषमपुर,चकिया, चन्दौली