Wednesday, November 21

कविताएं

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कवि चन्द्रशेखर मिश्र जी

कवि चन्द्रशेखर मिश्र जी

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  बस में सफर करते हुए हमारे आदर्श कवि चंद्रशेखर मिश्र जी के हृदय को एक मूंगफली बेच रहे अबोध बालक , जिसके साथ एक महोदय ने बद्तमीजी की थी, आघात पहुंचा और उनकी कलम चल पड़ी । 【उस अबोध बालक का दर्द देखिये कैसे व्यक्त करता है 】 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 पुस्तकों का बोझ लेकर चलने की उमर में चिनिया बदाम बेचने को चल देते हैं । दूध भात खाने का तो स्वप्न भी न देखा कभी गालियों झिड़कियों से पेट भर लेते हैं । बच्चा कहता है..........कि👇👇👇👇 धक्का मत दीजिये, खरीद लीजिये हुजूर भारत के नाते हम आपही के बेटे हैं धक्का मत दीजिये, खरीद लीजिये हुजूर भारत के नाते हम आपही के बेटे हैं पर गर्व हमें है कि हम मूंगफली बेचते हैं सुनता हूँ बड़े लोग देश बेच देते हैं ।। कव
योगेन्द्र शर्मा “योगी”

योगेन्द्र शर्मा “योगी”

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आतंकी हमले में जान गवानें वाले अमरनाथ भक्तों को समर्पित मेरी एक रचना.........!👏👏 गोली थी दहशतगर्दों की लेकिन घाव सियासी हैं अमरनाथ के भक्तों पर हमलावर कौन जेहादी हैं। मौन अभी तक जो हैं सेकुलर वो भी तो अपराधी हैं हर घटना पर निंदा केवल लगती कायर छाती है। आतंकी का धरम नहीं यह बातें कहाँ से आती हैं लेकर पत्थर भींड़ जो उमड़ी उनकी जात बताती है। हमदर्दी का चोला ओढ़े सत्ता लाश उठाती है देकर चंद खनकते सिक्के अवसर सिरफ़ भुनाती है। तुष्टिकरण की गीतें बेजां हर बार कलम जो गाती है सुख गई है स्याही उसकी या बेशर्म लजाती है। जो पुरस्कार लौटाये थे क्या ? उनको लज्जा आती है संकोच नहीं "योगी" कहता वे घर के अंदर घाती हैं। गोली थी दहशतगर्दों की लेकिन घाव सियासी है।।"योगी"
रामजियावन दास “बावला” जी

रामजियावन दास “बावला” जी

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​देश भइल आजाद मगर रण के बरबादी पउलस के सोचा आजादी पउलस के..... ? के के आपन खून बहावल के आपन सर्वस्व लुटावल केकर लड़िका बनें कलक्टर, इ ओस्तादी पउलस के सोचा आजादी पउलस के...?  केकरे आह से पर्वत टूटल शिव ब्रम्हा के आसन छूटल के योगी बन अलख जगवलस पर परसादी पउलस के सोचा आजादी पउलस के....?