Thursday, September 20

कविताएं

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योगेन्द्र शर्मा “योगी”

योगेन्द्र शर्मा “योगी”

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आतंकी हमले में जान गवानें वाले अमरनाथ भक्तों को समर्पित मेरी एक रचना.........!👏👏 गोली थी दहशतगर्दों की लेकिन घाव सियासी हैं अमरनाथ के भक्तों पर हमलावर कौन जेहादी हैं। मौन अभी तक जो हैं सेकुलर वो भी तो अपराधी हैं हर घटना पर निंदा केवल लगती कायर छाती है। आतंकी का धरम नहीं यह बातें कहाँ से आती हैं लेकर पत्थर भींड़ जो उमड़ी उनकी जात बताती है। हमदर्दी का चोला ओढ़े सत्ता लाश उठाती है देकर चंद खनकते सिक्के अवसर सिरफ़ भुनाती है। तुष्टिकरण की गीतें बेजां हर बार कलम जो गाती है सुख गई है स्याही उसकी या बेशर्म लजाती है। जो पुरस्कार लौटाये थे क्या ? उनको लज्जा आती है संकोच नहीं "योगी" कहता वे घर के अंदर घाती हैं। गोली थी दहशतगर्दों की लेकिन घाव सियासी है।।"योगी"
रामजियावन दास “बावला” जी

रामजियावन दास “बावला” जी

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​देश भइल आजाद मगर रण के बरबादी पउलस के सोचा आजादी पउलस के..... ? के के आपन खून बहावल के आपन सर्वस्व लुटावल केकर लड़िका बनें कलक्टर, इ ओस्तादी पउलस के सोचा आजादी पउलस के...?  केकरे आह से पर्वत टूटल शिव ब्रम्हा के आसन छूटल के योगी बन अलख जगवलस पर परसादी पउलस के सोचा आजादी पउलस के....?